पूज्य / अपूज्य
पूज्य कौन ?
सचरित्र वाला यानी परिग्रह त्यागी या परिग्रह छोड़ने की तैयारी वाला।
अपूज्य कौन ?
असचरित्र वाला, भगवान की पूजा करते समय भी भोग विलास में जिनका अभिप्राय रहता है जैसे देवता।
तो फिर देवता किसी का भला कैसे कर लेते हैं ?
भला तो सामने वाले के पुण्यानुसार ही कर पाते हैं जैसे तीर्थंकर भगवानों के अतिशय। पर वही देवता अपनी देवियों के लिए कुछ नहीं कर पाते।
इसी तरह धर्मायतनों में पैसा उन्हीं का लगता है जो सचरित्र वाले होते हैं।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 8 मई)




4 Responses
पूज्य एवं अपूज्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए पूज्य बनने का प़यास करना परम आवश्यक है।
Kya ‘असचरित्र’ waala धर्मायतनों में पैसा nahi laga sakta ? Ise clarify karenge, please ?
असचरित्र वाला लगाएगा नहीं /उसका मन नहीं होगा लगाने का यानी मंदिरों में असचरित्र वालों का पैसा लगता नहीं।
Okay.