विकास

संसार तथा परमार्थ में विकास के लिये …

  • एक आदर्श होना चाहिये जैसे भगवान।
  • आदर्श को समझने के लिये गुरु का अवलम्बन ज़रूरी है।
  • उनके बताये रास्ते पर चलने के लिये आचरण चाहिये ( इसमें साधर्मीजनों की मुख्य भूमिका रहती है। वे सद्मार्ग पर चलने में सहायक तथा अकेलापन महसूस नहीं होने देते )।

मुनि श्री विनम्रसागर जी

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One Response

  1. विकास का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए खास तौर पर परमार्थ के विकास के लिए भगवान् एवं गुरुओं पर श्रद्बान करना परम आवश्यक है, एवं उनके बताये रास्ते पर चलना भी आवश्यक है।

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