संसार नित्य भी है अनित्य भी है यह तो मानते होना!अगर एक ही नय से चलोगे तो आधे संसार को समझ पाओगे। तो पूरा संसार कैसे चलेगा जैसे सूट बनवाना है तो अभेद रूप कपड़ा खरीद के लाते हैं, वन पीस, दर्जी उसके टुकड़े टुकड़े कर देता है, यह भेद हो गया पर बाद में सिल देता है अभेद हो गया तभी आपका सूट सिल पता है
3 Responses
नय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
‘नित्य/अनित्य’ नय se sansaar kaise chalta hai ?Ise clarify karenge, please ?
संसार नित्य भी है अनित्य भी है यह तो मानते होना!अगर एक ही नय से चलोगे तो आधे संसार को समझ पाओगे। तो पूरा संसार कैसे चलेगा जैसे सूट बनवाना है तो अभेद रूप कपड़ा खरीद के लाते हैं, वन पीस, दर्जी उसके टुकड़े टुकड़े कर देता है, यह भेद हो गया पर बाद में सिल देता है अभेद हो गया तभी आपका सूट सिल पता है