संकलन
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे…
बांध-बांध कर क्यों रखना !
जब ख़ुद को बंध कर जाना ही है।
अर्थी पर भी, कर्मों से भी बँध कर।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे…
बांध-बांध कर क्यों रखना !
जब ख़ुद को बंध कर जाना ही है।
अर्थी पर भी, कर्मों से भी बँध कर।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
One Response
संकलन का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कर्मो को बांधकर जाने का प़यास नहीं करना चाहिए।