समता
भूतकाल के विकल्पों तथा भविष्य के भय से विचलित ना होना ।
जैसे छोटे छोटे बच्चे और साधु अनुकूल/प्रतिकूल परिस्थतिओं में समता रखते हैं ।
गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
भूतकाल के विकल्पों तथा भविष्य के भय से विचलित ना होना ।
जैसे छोटे छोटे बच्चे और साधु अनुकूल/प्रतिकूल परिस्थतिओं में समता रखते हैं ।
गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
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One Response
समता—शत्रु,मित्र में सुख, दुःख में,लाभ अलाभ और जय पराजय में हर्ष,विवाद नहीं करना या साम्य भाव रखना होता है।
अतः भूतकाल के विकल्पों तथा भविष्य के भय से विचलित ना होना चाहिए बल्कि छोटे बच्चे और साधु अनुकूल और प़तिकूल परस्थितियों में समता का भाव रहता है। जीवन में समता का भाव रख कर अपना कल्याण कर सकते हैं।