आचरण
आचार्य श्री विद्यासागर जी के पास एक विद्वान रोजाना स्वाध्याय करने आते थे। जाते समय भक्ति पूर्वक नमस्कार भी करते थे। एक दिन नमस्कार करना भूल गए। वापस आए तब तक शास्त्र जी विराजमान किए जा चुके थे। पर आचार्य श्री को नमस्कार नहीं किया। तब पता लगा कि वह रोजाना आचार्य श्री को नहीं, शास्त्र जी को ही नमस्कार करते थे।
उनके मित्र ने समझाया जिनके पास चरण हैं/ आचरण है उनके तो चरणों में विनय करके आचरण प्राप्त करते नहीं, जिसके पास चरण नहीं है सिर्फ ऐसे शास्त्र को पूरी श्रद्धा से नमस्कार करने से कल्याण कैसे होगा !
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 1मई)




One Response
आचरण को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आचरण होना परम आवश्यक है।