जरूरतों को कम, इच्छाओं को दुर्बल करना आध्यात्मिकता है।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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अध्यात्मिकता को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु आत्मा का कल्याण करना परम आवश्यक है, इसके लिए आराधना एवं साधना की परम आवश्यक है। साधना के लिए संस्कारिक मोह का त्याग करना परम आवश्यक है।
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अध्यात्मिकता को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु आत्मा का कल्याण करना परम आवश्यक है, इसके लिए आराधना एवं साधना की परम आवश्यक है। साधना के लिए संस्कारिक मोह का त्याग करना परम आवश्यक है।
Bahut hi kam shabdo me Maharajshri ne itne gehre concept of samjha diya ! Namostu
Gurudev !