कर्म-बंध
बंध के कारण –> भाव-कर्म।
बंध का कार्य —> द्रव्य-कर्म।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र 8/01, 8/02)
(भावकर्म कारण और द्रव्यकर्म कार्य.
भावकर्म रूप कार्य, द्रव्यकर्म रूप कारण के द्वारा ही होता है लेकिन द्रव्यकर्म के उदय में भावकर्म रूप कार्य हो, ये नियम नहीं क्योंकि ऐसा यदि मानेंगे तो जीव का कभी मोक्ष नहीं होगा….. कल्पेश भाई – मुंबई)




One Response
कर्म -बंध को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।