चारित्र मोहनीय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु सुख एवं दुःख में समता का भाव रखना परम आवश्यक है। Reply
‘पुण्योदय’ me kabhi-kabhi ‘पापोदय’ ke comparison me ‘समता’ rakhna jyaada mushkil ho jaata hai ! Namostu Gurudev ! Reply
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चारित्र मोहनीय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु सुख एवं दुःख में समता का भाव रखना परम आवश्यक है।
‘पुण्योदय’ me kabhi-kabhi ‘पापोदय’ ke comparison me ‘समता’ rakhna jyaada mushkil ho jaata hai ! Namostu Gurudev !