चारित्र मोहनीय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु सुख एवं दुःख में समता का भाव रखना परम आवश्यक है। Reply
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चारित्र मोहनीय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु सुख एवं दुःख में समता का भाव रखना परम आवश्यक है।