अकाल में भी जब सब ओर पानी समाप्त हो जाता है, आँख में पानी बचा रहता है (जब तक आदमी बचा रहता है)।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
Share this on...
One Response
दया जैन धर्म का मूल मंत्र है।दया का मतलब दीन दुखी जीवों के प्रति उपकार का भाव रखना है। अतः उपरोक्त कथन सत्य है कि अकाल में भी जब सब और पानी समाप्त हो जाता है, लेकिन आंखों में पानी बचा रहता है, आदमी भी उस समय तक बचा रहता है।
One Response
दया जैन धर्म का मूल मंत्र है।दया का मतलब दीन दुखी जीवों के प्रति उपकार का भाव रखना है। अतः उपरोक्त कथन सत्य है कि अकाल में भी जब सब और पानी समाप्त हो जाता है, लेकिन आंखों में पानी बचा रहता है, आदमी भी उस समय तक बचा रहता है।