क्या निधत्ति और निकाचित कर्म भक्ति और अदान को भी प्रभावित करते हैं?
योगेन्द्र
हाँ, ये कर्म पुण्य तथा पाप दोनों प्रकृतियों को प्रभावित करते हैं। भक्ति ऐसी कि खत्म ही ना हो। अदान ऐसा कि चाहे कितना भी समझा लो दान नहीं देगा तो नहीं देगा।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (30 अप्रैल)
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निघति और निकाचित को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।
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निघति और निकाचित को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।