पापी भी सुखी ?
साइकिल पैडल मारने पर चलती है। लेकिन ढलान पर बिना पैडल मारे भी!
क्योंकि पहले काफी पैडल मारकर अच्छी गति प्राप्त कर ली थी।
ढलान भी पूर्व के पुण्योदय से प्राप्त होती है।
पापी ने भी पूर्व में बहुत पुण्य कमाया जो आज बगैर पुण्य किए सुख भोग रहा है।
मुनि श्री विनम्रसागर जी




One Response
पापी भी सुखी को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए पाप के उपरान्त पुण्य अर्जित करने पर सुखी रह सकता हैं।