जैसे मंदिर में हम ग़लत न बोल सकते हैं ना ही ग़लत कर सकते हैं।
ऐसे ही यदि हम अपने घर को “भगवान का घर” कहने/ मानने लगें तो घर में भी ग़लत न बोल पायेंगे ना ही ग़लत कर पायेंगे।
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भगवान् का घर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु परिवार या अन्य जगह हो उधर भगवान का मन्दिर या घर मानकर चलना परम आवश्यक है, ताकि गलत कार्यों से बचा जा सकता है।
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भगवान् का घर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु परिवार या अन्य जगह हो उधर भगवान का मन्दिर या घर मानकर चलना परम आवश्यक है, ताकि गलत कार्यों से बचा जा सकता है।