रागी देवी देवता
आगम में दोनों तरह के दृष्टांत आते हैं। जिसमें रागी देवी देवता तीर्थंकर की रक्षा में निमित्त बने और तिर्यंच ने मुनिराज की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। जिन देवी देवता की रक्षा बहुत प्रसिद्ध हुई वे तीर्थंकर की रक्षा कर रहे थे, जिनको कोई छू भी नहीं सकता था। जबकि तिर्यंच मुनिराज की रक्षा यदि नहीं करता तो उनका अकालमरण संभव था।
गुणस्थान की अपेक्षा देखें… रागी देवी देवता पहले से चौथे गुणस्थान जबकि तिर्यंच पहले से पांचवें गुणस्थान वाले होते हैं।
खु़द ही तय करें किनको ज्यादा महत्व देना चाहिए !
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 4 मार्च)




One Response
रागी देवी देवता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।