विनय
मुनिराज को आहार कराते समय, नीचे रखे बर्तन को पैर से खिसकाने में क्या दोष है ?
वंश जैन – छीपीटोला (आगरा)
आहार कराते समय के बर्तन को तो छोड़ो, किसी भी बर्तन या वस्तु को पैर से नहीं खिसकाना चाहिए। ये वस्तुएं यदि विनय के योग्य नहीं, पर अविनय के योग्य तो बिलकुल नहीं। धातु से बनी किसी भी चीज़ का त़ो विशेष ध्यान रखना चाहिए क्योंकि भगवान की मूर्तियां धातु से भी बनाई जाती हैं।
तत्त्वार्थसूत्र जी के अनुसार कर्मबंध अजीवाधिकरण से भी होता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 2 अगस्त)




4 Responses
विनय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आवश्यकता अनुसार विनय होना परम आवश्यक है।
‘अजीवाधिकरण’ ka meaning explain karenge, please ?
अजीव के आधार से।
Okay.