शरीर
पहले शरीर मेरे अनुसार चलता था; अब (वृद्धावस्था में) मुझे शरीर के अनुसार चलना पड़ता है। क्या करना चाहिये ?
यदि शरीर को पहले से संस्कारित करें, तो बाद में वह आपके अनुसार चलेगा।
शरीर आपके अनुसार नहीं चल रहा; इसमें ज्यादा नुकसान नहीं। हाँ, मन के अनुसार कदापि नहीं चलना चाहिये !
निर्यापक मुनि सुधा सागर जी




4 Responses
शरीर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।
शरीर mere anusaar chalne me aur man ke anusaar chalne me kya difference hai ? Ise clarify karenge, please ?
मेरे का मतलब आत्मा/ कर्तव्य/ संस्कार।
मन का मतलब इच्छाएं।
Okay.