शिखर जी

लगभग 30 साल पहले शिखर जी की यात्रा करते समय, मित्र साथ में था। आखिरी 9 किलोमीटर रह जाने पर उसके मुँह में कफ आ गया, वह 9 किलोमीटर तक अपने मुँह में कफ रखे ही नीचे आया ताकि पर्वत पर अपवित्रता न हो जाए।
आज शिखर जी पर संकट हमारे द्वारा ही आ रहा है क्योंकि हम वहाँ पर खानेपीने की चीजों को प्रोत्साहन देकर अपवित्रता फैलाते जा रहे हैं।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 31 जुलाई)

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One Response

  1. शिखर जी का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए शिखर जी पर्वत को अपवित्र करने का प़यास नहीं करना चाहिए, ऐसा होने पर वह पाप का भागीदार होगा। शिखर जी पहाड को पवित्र बनायें रखना परम आवश्यक है।

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