आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे… झूठ यदि सफ़ेद हो सकता है तो सत्य को कड़वा कहने में क्या दुविधा !
पर सत्य होता है बर्फ़ जैसा, अग्नि पर रखने पर भी वह गर्म नहीं होता, वह अपना सत्यपना नहीं छोड़ता।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 12 मई)
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सत्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सत्य को अपनाना परम आवश्यक है। सत्य में मिलावट नही करना चाहिए।
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सत्य को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए सत्य को अपनाना परम आवश्यक है। सत्य में मिलावट नही करना चाहिए।