साक्षात
मंदिर में भगवान की मूर्ति के सामने एक मिनट भी ध्यान लगाना मुश्किल होता है। जबकि मुनिराज को आहार देते हुए पूरे समय ध्यान भटकता नहीं।
कारण ?
साक्षात परमेष्ठी सामने खड़े होते हैं और उनका निर्विघ्न/ सानंद पूर्वक आहार पूर्ण हो, लगातार यह भावना भाते रहते हैं।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 30 अप्रैल)




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साक्षात के लिए भगवान् को हृदय में विराजमान करना परम आवश्यक है।