स्वभाव
दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं…
पहले… भूमि पर उगे बरगद की तरह जो सबको छाया आदि देते हैं।
दूसरे… उस बरगद जैसे जो दीवार आदि पर उग आते हैं। छाया कम, जहाँ आश्रय पाते हैं, उसे ही तोड़ देते हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
दो प्रकार के व्यक्ति होते हैं…
पहले… भूमि पर उगे बरगद की तरह जो सबको छाया आदि देते हैं।
दूसरे… उस बरगद जैसे जो दीवार आदि पर उग आते हैं। छाया कम, जहाँ आश्रय पाते हैं, उसे ही तोड़ देते हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
One Response
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने स्वभाव को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु स्वभाव ऐसा होना चाहिए जो स्वयं एवं अन्य लोगों को आनन्ददायक होना परम आवश्यक है।