भगवान से भी तू-तू, मैं-मैं हो सकती है।
जो तू है, वह मैं बन सकता हूँ, पर जो मैं हूँ वह तू नहीं बन सकता।
चिंतन
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भगवान् से संवाद को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु भगवान् से यही प्रार्थना करना उचित होगा कि में भी आपकी तरह बनना चाहता हूं।
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भगवान् से संवाद को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु भगवान् से यही प्रार्थना करना उचित होगा कि में भी आपकी तरह बनना चाहता हूं।
Bahut hi interesting chintan hai !