स्व / पर
दो प्रकार के लोग →
1. स्वस्थानिक – जो अपनी आत्मा में रहते हैं।
बड़ों से पूछो → कहाँ रहते हो ?
जबाब – ग्वालियर, आगरा, दिल्ली, मुंबई आदि।
बच्चों का जबाब – जी, अपने घर में।
2. परस्थानिक – जो पर के पीछे भागते हैं। यहाँ ऐसे लोग भी हैं जो जसलोक (मुम्बई का अस्पताल) से परलोक की यात्रा करते हैं, अंत धार्मिक नहीं।
*जस = यश।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया




4 Responses
स्वयं एवं पर का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अपनी आत्मा का परिचय देना परम आवश्यक है।
1) 1st point se yeh clear hota hai ki bacche, badon ki apeksha zyaada apne me rehte
hain ?
2) 2nd point me ‘जसलोक’ ka dual arth hai na i.e. yash ke peeche bhagne waalo ka aur hospital se parlok jaane waalo ka dhaarmik ant nahi hota hai ?
In 2 points ko clarify karenge, please ?
1) सही।
2) सही।
Okay.