अनर्थ फल
प्रश्न: पाप का अनर्थफल क्या है ?
उत्तर: मन का अस्तव्यस्त/अशांत होना।
-आचार्य श्री अमोघवर्ष कृत प्रश्नोत्तर-रत्नमाला (गाथा सं 15)
यह पाप का प्रत्यक्ष/तुरंत मिलने वाला दंड है। पाप का अप्रत्यक्ष दंड समाज/क़ानून से मिलता है। अकेले में की गयी ग़लती का किसी के सामने बयान करने का साहस नहीं होता। दूसरों की नज़रों में गिरना स्वयं की नज़र में गिरने से कम दुखदायी है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी का हाइकु:
कोई देखे तो
लज्जा आती, मर्यादा
टूटने से ना।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 2 मई)




One Response
अनर्थ फल का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ऐसा कार्य नही करना चाहिए जिससे अनर्थ फल मिल सके।