अनुमोदना में छठा भाग
कहा जाता है कि दान आदि पुण्य क्रियाओं की अनुमोदना करने से पुण्य क्रिया करने वाले के पुण्य के छठे हिस्से के बराबर पुण्य मिलता है। यह पुण्य करने वाले के हिस्से में से छठा हिस्सा नहीं मिलता बल्कि आपके मन,वचन,काय तथा कृत,कारित,अनुमोदना करने से पुण्य क्रिया करने वाले के पुण्य के छठे हिस्से के बराबर पुण्य, अनुमोदना करने वाले को मिलता है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 14 मई)




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अनुमोदना मे छठा भाग का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए परमार्थिक कार्यों का अनुमोदना करना परम आवश्यक है, ताकि उसका छठवां भाग का फल मिल सकता है।