आत्मा का शरीर छोड़ना
गुरुजन बताते हैं –> किसी भी कर्म के निषेक झड़ना शुरू में अधिक, आगे-आगे कम-कम होते जाते हैं।
इसीलिए कथंचित् आगे जाकर इतने कम हो जाते हैं कि जरा सा झटका लगते ही आत्मा शरीर को छोड़ जाती है।
अकाल/ शुरू के मरण में जोर के झटके जैसे दुर्घटनादि होने पर पूरे निषेक झड़कर आत्मा शरीर छोड़ती है।
चिंतन




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आत्मा का शरीर छोडने को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मा का कल्याण करना परम आवश्यक है।