आहार
मनुष्य का विकास सिर्फ़ भोजन से ही नहीं, आहार वर्गणाओं से भी होता है। अच्छे विकास के लिए प्रसन्न रहना तथा प्रशस्त नोकर्म वर्गणाएँ ग्रहण करना आवश्यक है। तब कम भोजन से भी काम चल जाता है।
केवलज्ञानी तो कवलाहार लेते ही नहीं, सिर्फ़ नोकर्म वर्गणाएँ ही ग्रहण करते हैं।
एकेंद्री जीव लेपाहार तथा कर्माहार करते हैं।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 5 मार्च)




6 Responses
आहार का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।
‘आहार वर्गणाओं’ aur ‘ प्रशस्त नोकर्म वर्गणाओं‘ ka meaning clarify karenge, please ?
आहार वर्गणाएँ तो हर कोई लेता है चाहे वह विकास चाहे या विनाश। लेकिन जो विकास चाहते हैं वह अच्छी/ प्रशस्त वर्गणाएँ। प्रसन्न रहने से भी प्रशस्त वर्गणाएँ आती हैं।
अच्छी/ प्रशस्त वर्गणाएँ kya आहार वर्गणाएँ ka hi part hai ? Ise clarify karenge, please ?
आहार वर्गणाओं से ही तो आगे सारा काम होता है। स्टार्ट आहार से ही करते हैं । शरीर चलाने के लिए आहार वर्गणाएँ कहो या नामकर्म वर्गणाएँ कहो एक ही बात है।
Okay.