उत्तम क्षमा
जो नज़रें झुकाए चलते हैं, दुनिया उनको नज़रें उठाए देखती है जैसे आचार्य श्री विद्यासागर जी जब हावड़ा ब्रिज से निकल रहे थे उनकी नज़रें झुकी हुई थीं, दुनिया की नज़रें उन पर झुकी हुई थीं।
क्षमा की चोट क्रोध पर भारी पड़ती है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 28 अगस्त)
क्रोध “पर” को जीतने के लिए किया था लेकिन “पर” ने हरा दिया।
क्षमा मांगने से निर्भय होते हैं,
करने से निर्भार।




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उत्तम क्षमा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए क़ोध को समाप्त करने के लिए क्षमा मागंना परम आवश्यक है।