उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म
हमारी आत्मा ब्रह्म रूप और इसकी बाहरी तत्वों से रक्षा करना ब्रह्मचर्य-धर्म,
रक्षा जागृत रहने से, संसार के रंगीन सपनों को देखते रहने में नहीं।
ब्रह्म की उपासना तथा रक्षा करने वाला ब्रह्म ही है, इसीसे हमारे बल तथा बुद्धि की रक्षा होती है।
जगत का रूप जानने से राग होता है और स्वरूप जानने से संसार कम।
संबंध अच्छाई से, निर्बंध सच्चाई से, सच्चाई और अच्छाई मिल जाए तो भगवान की परछाई बन जाते हैं।
मुनि श्री सौम्य सागर जी महाराज




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उत्तम ब़ह्मचर्य धर्म का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। ब़ह्मचर्य केवल इन्द्रिय संयम ही नहीं बल्कि विचार,वाणी एवं आचरण में पवित्रता होना चाहिए। अतः मन, वचन,काय में पवित्रता होना परम आवश्यक है। ब़ह्म का मतलब आत्मा से है, अतः विषयों एवं वासना से सुरक्षित रहकर आत्मा में लीन रहना परम आवश्यक है ताकि आत्म कल्याण एवं मोक्ष मार्ग का पालन हो सकता है।