उत्तम संयम
भवन में कचरा तो होता है। यदि उसे साइड में कर दिया तो साफ दिखाई देता है लेकिन बाहर ही हवा लगते ही फिर वह पूरे भवन में फैल जाता है। कचरे को कोने में करना देशसंयम है। पर इसे समय-समय पर साफ करते रहना होगा। कचरे को पूरा भवन के बाहर कर देना सकलसंयम।
हममें यह कचरा कषाय रूप में रहता है जिससे सारे पाप प्रवेश कर जाते हैं। पर छोड़ते समय पाप को पहले छोड़ना होगा।
संयम हमारे गुणों को ग्रिप प्रदान करता है ताकि हम फिसल ना जाएँ, इससे हमारे जीवन को भी ग्रिप मिलती है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 2 सितम्बर)



