उत्तम सत्य धर्म

क्रोध, लोभ, भय और हँसी को त्यागने तथा शास्त्र के अनुसार वचन बोलने पर ही सत्य कहा जा सकता है।
आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे कि सत्य साबित करने का नहीं, महसूस करने का है वरना उसकी अनुभूति नहीं हो सकती।
आज सोशल मीडिया ने सत्य की धज्जियाँ उड़ा दी हैं।
सत्य को उजागर करने की हट ने उसको अजगर बना दिया है जो मुँह खोल अनेक को लील रहा है, होना था सत्य में लीन।
हमारे वंश में पंचशील सिद्धांत था। अब हमारे अंश ही उसे विध्वंस कर रहे हैं।
एक शिष्य झूठ बहुत बोलता था। गुरु ने 1 साल तक किस्से कहानी (किससे का हानि) से सत्य की तालीम दी। आश्रम छोड़ते समय गुरु ने पूछा यदि तुमको नोट से भरा हुआ थैला मिल जाए तो क्या करोगे ? सत्य बोलने का संकल्प लिया है, अगर कोई नहीं देख रहा होगा तो मैं उस थैली को उठा लूंगा।
गुरु… सत्य बोलना तो सीख गए पर सत्य निष्ठा तुमसे दूर है।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 1 सितम्बर)

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4 Responses

  1. उत्तम सत्य धर्म का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। सत्य के लिए आत्मा की आनुभुति होना परम आवश्यक है। सत्य के लिए असत्य का त्याग करना परम आवश्यक है। अतः जीवन असत्य के त्याग को संकल्प लेकर छोडना परम आवश्यक है।

    1. अहिंसा सत्य आदि पाँच जो हैं, पाँच पापों के उल्टे।

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