उपयोग
शांतिधारा(भगवान के ऊपर जल ढालना) करते समय जल की धारा टूटने पर प्रायश्चित बहुतों ने लिया क्योंकि उसका उपयोग टूट गया था। पर गुरु के प्रवचन की धारा तोड़ने वाला आज तक कोई नहीं आया !
गर्भ में अभिमन्यु का उपयोग जब तक लगा रहा, वह चक्रव्यूह तोड़ने की कला में माहिर हो गया। उपयोग टूटने पर चक्रव्यूह से निकलने की कला ना सीख सका और धर्म की नीति का शिकार हुआ जबकि कौरवों ने धर्मनीति का शिकार किया।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 3 जुलाई)




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उपयोग का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए अच्छे कार्यो का उपयोग पूरा करना परम आवश्यक है।