प्यासे को मिर्च खिला दो तो पानी तो आएगा पर कंठ में नहीं, आँखों में दिखेगा। लेकिन प्यास बुझाएगा नहीं। यह तो मृगमरीचिका से भी ज्यादा खतरनाक स्थिति है।
इसीलिए कहा है कि अज्ञान से बदतर कुज्ञान है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 15 अप्रैल)
Share this on...
One Response
कुज्ञान को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कुज्ञान से बचकर रहना परम आवश्यक है।
One Response
कुज्ञान को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कुज्ञान से बचकर रहना परम आवश्यक है।