चक्रवर्ती
कहा है बहु आरंभ परिग्रह नरक आयु का निमित्त है।
पर चक्रवर्ती तो सब नरक में जाते नहीं हालांकि उनके पास वैभव बहुत ज्यादा होता है ?
चक्रवर्ती संपदा का संवर्धन/ अर्जन नहीं करते, पूर्व के पुण्य से पाते हैं। इसलिए चक्रवर्ती की संपदा में सावद्य आरंभ नहीं होता।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 24 मई)




6 Responses
चक़वर्ति का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।
‘सावद्य आरंभ’ ka kya meaning hai, please ?
सावद्य आरंभ यानी वे कार्य जिनमें हिंसा हो/ डे टू डे के कार्य।
Bharat चक्रवर्ती ne phir kyun संपदा का संवर्धन karna chaha ? Ise clarify karenge, please ?
जैसा कहा उनको वैभव पूर्व के कर्मों से मिलते हैं।
दूसरा यह नियोग होता है
और
तीसरा जब भी वे नियोग के कारण विजय यात्रा पर निकलते हैं, उन्हें कहीं हिंसा नहीं करनी पड़ती है, सब लोग उनके वैभव को देखकर सरेंडर हो जाते हैं, भेंट देने लगते हैं।
Okay.