प्यास
पानी को भी पानी की प्यास होती है तभी तो नदी समुद्र की तरफ दौड़ती है।
यदि यह प्यास समर्पण के लिए हो तो फिर नदी को समुद्र बना देती है, बहुत बड़ा/ विशाल बना देती है। यदि समर्पण/ देने का भाव ना हो तो प्यास प्यास कह कर के दम तोड़ देते हैं। मृगमरीचका वाली प्यास में भी जीव प्राण त्याग देता है, जहां पानी है ही नहीं उससे प्यास बुझाना चाहता है।
मुनि श्री प्रमाण सागर जी



