मन
दो प्रकार के मन मानो → एक शरीर का दूसरा आत्मा का।
शरीर का मन कहता है खाओ पीओ ऐश करो। आत्मा का मन कहता है व्रत उपवासादि करो।
जीतेगा का कौन ?
यदि शरीर वाले को ज्यादा महत्व/ समय देंगे तो शरीर वाला अन्यथा आत्मा वाला।
आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी




One Response
मन का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु मन को आत्म कल्याण हेतु प़यास करना परम आवश्यक है। जीवन में मन को शारीरिक विकास को छोड़कर आत्म कल्याण हेतु श्रद्बान करना परम आवश्यक है।