जघन्य अवगाहना

अपर्याप्तक निगोदिया जीव के शरीर की अवगाहना पहले समय में आयताकार, दूसरे में घनाकार और तीसरे समय में गोल हो जाती है, यही किसी भी जीव की जघन्य अवगाहना होती है।
पहले और दूसरे समय वाले शरीरों को जघन्य क्यों नहीं कहा ?
क्योंकि इनका कौनसा साइज ग्रहण करें, डायगोनल/ लंबा या चौड़ा ! जबकि गोल में साइज एक ही रहती है यानी निश्चित होती है।

मुनि श्री सौम्य सागर जी – चिंतन (जीवकांड – 9 मई)

Share this on...

One Response

  1. जघन्य अवगाहन को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives

June 25, 2025

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930