जो दूसरों को जिंदा न रहने दे, उसे जिंदा नहीं कह सकते/ उसे जिंदा रहने का अधिकार नहीं।
2) जो गुरु/ भगवान के सामने अकड़ा रहे (मुर्दे जैसा) उसे जिंदा कैसे कहें !
चिंतन
Share this on...
One Response
जिंदा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए जिंदा रहने का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण रुप से विचलित करता है अतः निराशा के भाव रखना उचित नहीं है। अतः जीवन के कल्याण के लिए गुरुओ एवं भगवान पर क्षद्धा एवं विश्वास रखना परम आवश्यक है।
One Response
जिंदा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए जिंदा रहने का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण रुप से विचलित करता है अतः निराशा के भाव रखना उचित नहीं है। अतः जीवन के कल्याण के लिए गुरुओ एवं भगवान पर क्षद्धा एवं विश्वास रखना परम आवश्यक है।