सन 1977 में आचार्य श्री विद्यासागर जी का का स्वास्थ्य अच्छा नहीं था।
पं. सहजानंद जी स्वाध्याय करा रहे थे।
पेज नं. 77 पर आये तब आचार्य श्री ने कहा –> पं. जी देखा! सन 77 है, पेज 77 है और आपकी उम्र भी 77 !
आचार्य श्री का संकेत –> चारित्र कब ग्रहण करोगे ?
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
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ज्ञान एवं चारित्र को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ज्ञान के साथ चारित्र होना परम आवश्यक है।
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ज्ञान एवं चारित्र को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए ज्ञान के साथ चारित्र होना परम आवश्यक है।