तप / उपसर्ग
तप का उतना महत्व नहीं जितना उपसर्ग-विजय का ।
भरत चक्रवर्ती के अंतर्मुहूर्त में केवलज्ञान का इतना महत्व नहीं जितना पार्श्वनाथ भगवान का, इसीलिये पार्श्वनाथ भगवान की मूर्तियाँ बहुत ज्यादा मिलतीं हैं।
मुसीबत आने पर उपसर्ग-विजेताओं का ध्यान करने से सहना आसान हो जाता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी




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तप एवं उपसर्ग का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए तप की अपेक्षा उपसर्ग से सहन करके बाहर आना परम आवश्यक है।