सभी तीर्थंकरों के प्रथम आहार का वर्णन तो मिलता है, पर महावीर भगवान के कई आहारों का मिलता है।
प्रथम आहार के समय पंचाश्चर्य तो सब तीर्थंकरों के होते हैं लेकिन महावीर भगवान के अन्य आहारों के समय भी हुए थे।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
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मुनि श्री सुधासागर महाराज जी ने तीर्थंकर के विषय में उत्तम जानकारी प़दान की गई है, उस में विश्वास करना परम आवश्यक है।
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मुनि श्री सुधासागर महाराज जी ने तीर्थंकर के विषय में उत्तम जानकारी प़दान की गई है, उस में विश्वास करना परम आवश्यक है।
‘पंचाश्चर्य’ kaun-kaunse hote hain ? Ise clarify karenge, please ?
रत्नवृष्टि, देव दुंदुभी, पुष्पवृष्टि, मंद सुगंधित वायु प्रवाह, अहोदानम् की ध्वनि।
‘अहोदानम्’ ka kya meaning hai, please ?
ऐसा आहार दान देने वाले का अहो भाग्य अहो भाग्य।
Okay.