दान देने में भी आनंद तभी आता है जब आप स्वाधीन हों,
जैसे भिखारी को खिलाते समय कोई प्रतिक्रिया की अपेक्षा नहीं सो खिलाने में आनंद आता है, मेहमान आदि को खिलाते समय हमारी खुशी प्रतिक्रिया के अधीन होती है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 6 जुलाई)
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दान में स्वाधीनता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए दान में स्वाधीनता होना परम आवश्यक है।
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दान में स्वाधीनता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए दान में स्वाधीनता होना परम आवश्यक है।
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