दान
पहले तात्कालिक लाभ को प्राथमिकता पर दीर्घकालीन ज्यादा महत्वपूर्ण।
मंदिर आदि में (बोलियाँ आदि लेना) चार प्रकार के दानों के अलावा, धर्म प्रभावना के लिए “धर्मदान” में आयेगा।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (जिज्ञासा समाधान – 4-4-22)
पहले तात्कालिक लाभ को प्राथमिकता पर दीर्घकालीन ज्यादा महत्वपूर्ण।
मंदिर आदि में (बोलियाँ आदि लेना) चार प्रकार के दानों के अलावा, धर्म प्रभावना के लिए “धर्मदान” में आयेगा।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (जिज्ञासा समाधान – 4-4-22)
4 Responses
दान का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए दान का लाभ दीर्घकालिक रहे इस प्रकार का दान करना परम आवश्यक है।
Daan taatkalik laabh dega ya deerghkaleen? Ise clarify karenge, please ?
सधर्मीं भाइयों को जरूरत है, उनको हेल्प की तो तात्कालिक दान हुआ।
मंदिर बनाने में दान किया उसका लॉन्ग टर्म इफेक्ट हुआ जो सम्यग्दर्शन में निमित्त बना।
Okay.