समवसरण में पहले गुणस्थान वाले द्रव्यलिंगी मुनि भी 13वें गुणस्थान वाले मुनियों के कोठे में बैठते हैं। ऐसे ही श्रावक 5वें गुणस्थान तक के साथ-साथ श्रावकों के कोठे में।
द्रव्य भी आदरणीय है।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
Share this on...
One Response
द़व्य भी आदरणीय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।
One Response
द़व्य भी आदरणीय का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।