धैर्य / आलस
धैर्य, क्षमतानुसार पुरुषार्थ करके बिना विकल्प के फल का इंतज़ार करना।
क्षमतानुसार पुरुषार्थ न करके फल का इंतज़ार करना, आलस होता है।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
धैर्य, क्षमतानुसार पुरुषार्थ करके बिना विकल्प के फल का इंतज़ार करना।
क्षमतानुसार पुरुषार्थ न करके फल का इंतज़ार करना, आलस होता है।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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धैर्य एवं आलस को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आलस को छोडना परम आवश्यक है, जबकि धैर्य रखना परम आवश्यक है।