द्रव्य / पर्याय

द्रव्य तो सबका ज्ञानमय है। पाँचों ज्ञान सब में, प्रकट ज्ञानी के।
पर्याय बदलने पर ही द्रव्य का मूल जैसे पत्थर में सोना‌, इंजीनियर तो बहुत सफल कुछ ही।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – अध्याय 4)

Share this on...

4 Responses

  1. द़व्य/पर्याय को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।

  2. 1) ‘पाँचों ज्ञान सब में’ kaha to ‘अभव्य’ ke bhi maane? Ise clear karenge, please ?
    2) ‘द्रव्य का मूल’ ka meaning clarify karenge, please ?

    1. 1) हाँ पाँचों ज्ञान तो अभव्य में भी केवलज्ञान पर ढका हुआ, प्रकट रूप नहीं।
      2) द्रव्य का मूल मीन्स असलियत जैसे पत्थर में सोना निकले तो असलियत, सफलता इंजीनियरिंग का मूल है वरना इंजीनियर तो बहुत सारे होते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives
Recent Comments

May 15, 2026

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930