Month: August 2026

समवसरण में केवलज्ञान

समवसरण में केवलज्ञान उत्पन्न हो सकता है। भरत चक्रवर्ती के सेनापति जयकुमार भगवान आदिनाथ के 71वें गणधर थे। उनको मोक्ष आदिनाथ भगवान से पहले हुआ

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सहज / सरल

इतने सहज भी न हो जाना की जानवरों की तरह बिना शर्म के कहीं भी/ कभी भी/ कुछ भी करने लग जाओ। बच्चों की तरह

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सुख / दु:ख

सुख/दु:ख, मोहनीय/वेदनीय से। शरीर से मोह तो शरीरगत व्याधियों से दु:ख/ ठीक होने पर सुख। शरीर को सुन्न करने से शरीर की बाधाएँ/ दु:ख का

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पेंशन

सेवा में थे तब पूरी पगार, सेवा-निवृत्त होने पर आधी। आज (81 साल के होने पर) पूछते हैं… कैसे हो ? सेहत/ हालात पेंशन वाले*

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पुण्यानुबंधी / पापानुबंधी

पुण्यानुबंधी करने वाले जीव के संपर्क में आने वाले भी पुण्य का अनुबंध करने के लिए प्रेरित होने लगते हैं। ऐसे ही पापानुबंधी वाले के

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मोक्षमार्ग

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे… “मोक्षमार्ग बाहर है ही नहीं।” जैसे हवाई जहाज उठने के बाद बाहर दौड़ने में सहायक, पहियों को भी अंदर

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निमित्त

“घी बनावे मालपुआ, नाम बहू का होय।” हालांकि घी आदि में उपादान शक्ति है। पर बिना बहू (निमित्त) के क्या स्वादिष्ट माल बन पायेंगे!! क्षुल्लक

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दान / त्याग

दान पर-वस्तु का जैसे धन आदि। त्याग स्व-वस्तु का जैसे क्रोध आदि (कषाय)। क्रोध तभी आता है जब मान को धक्का लगता है। जैसे एक

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तपादि

तीर्थदर्शन/ तपादि भाग्य से नहीं, भाग्य तो औदयिक है। तपादि तो क्षयोपशम से होते हैं। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

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छाया / अंधकार

छाया और अंधकार में फ़र्क़ क्या है ? अंधकार… प्रकाश का अभाव। छाया….. प्रकाश की अवरोधित अवस्था। चिंतन

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मंगल आशीष

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August 31, 2026