परोपकार
एक दीपक दूसरे को प्रकाशित करते समय अपनी बाती/ घी/ प्रकाश नहीं देता फ़िर भी दूसरा प्रकाशित हो जाता है/ उसके जीवन से अंधकार समाप्त हो जाता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
एक दीपक दूसरे को प्रकाशित करते समय अपनी बाती/ घी/ प्रकाश नहीं देता फ़िर भी दूसरा प्रकाशित हो जाता है/ उसके जीवन से अंधकार समाप्त हो जाता है।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
One Response
परोपकार का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए परोपकार के भाव रखना परम आवश्यक है।