8 प्रकार की शुद्धि(काय, भाव, भाषा, विनय, ईर्यापथ, भैक्ष, शयनासन, प्रतिष्ठापन) की कमी से प्रमाद आता है। प्रमाद से बचने के लिए 5 समिति, 3 गुप्ति का अभ्यास/ नियम लिया जाता है।
मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 8/7)
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