बुद्धि
बुद्धि तीन प्रकार की होती है।
कर्तृत्व बुद्धि- कर्ता का अहम्, जो पर-नैमित्तिक है।
भोक्तृत्व-बुद्धि- भोग का वहम, जो दूसरों से अपेक्षा के कारण पीड़ादायक है।
स्वामित्व बुद्धि- कर्तृत्व बुद्धि + भोक्तृत्व-बुद्धि।
इनमें से एक बुद्धि के आने पर दूसरी बुद्धियाँ भी आ जाती हैं और ये आपस में बदलती भी रहती हैं।
इनसे बचने के लिए अकेले में विचारों के प्रति सावधान रहें और सबके बीच शब्दों के प्रति। यह सभी समस्याओं का समाधान है।
मुनि श्री सौम्य सागर जी (जिज्ञासा समाधान – 4 मार्च)




3 Responses
‘भोक्तृत्व-बुद्धि’ ka meaning clarify karenge, please ?
सरल भाषा में भोग बुद्धि। पर है तो ग़लतफ़हमी ही कि मैं किसी को भोग रहा हूँ। जो भी हम भोगते हैं कर्मों के क्षयोपशम से ही।
Okay.