बुराई का आकर्षण
बुराई के प्रति आकर्षण होता ही नहीं है ।
जिसको बुरा सिर्फ कहा ही नहीं, मन से भी बुरा मान लिया,
जैसे कूड़ा/ज़हर, तो आकर्षण होगा !
मुनि श्री सुधासागर जी
बुराई के प्रति आकर्षण होता ही नहीं है ।
जिसको बुरा सिर्फ कहा ही नहीं, मन से भी बुरा मान लिया,
जैसे कूड़ा/ज़हर, तो आकर्षण होगा !
मुनि श्री सुधासागर जी
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One Response
मनुष्य को बुराईयां के प़ति आकषर्ण अधिक होता है, जबकि अच्छाईयां के प़ति कम होता है क्योंकि बुरा कहा ही नहीं लेकिन मन से बुरा मान लेते हैं, जैसे कूड़ा और ज़हर,तो आकषर्ण होगा क्या !